अलवर को मिली बड़ी पहचान: राजस्थान की पाँचवीं रामसर साइट घोषित
राजस्थान के अलवर जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि यहाँ स्थित सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake) को राजस्थान की 5 (पाँचवीं)रामसर साइट के रूप में मान्यता दी गई है। यह राज्य के पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देगी बल्कि अलवर जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नहीं पहचान मिलेगी रामसर सूची में शामिल होने किसी भी आर्द्रभूमि (Wetland) के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि से कम नहीं है |
रामसर साइट क्या होती है?
रामसर साइट उन आर्द्रभूमियों को कहा जाता है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर आर्द्रभूमियों के रूप संरक्षण में रामसर कंजर्वेशन (Ramsar Convention) के रूप में मान्यता दी जाती है यह मान्यता 1971 में ईरान के रामसर से दी जा रही है रामसर साइट का मुख्य उद्देश्य हैं आधार भूमियों को संरक्षण प्रदान करना जैव विविधता को बनाए रखना प्रवासी पक्षियों के आवास की रक्षा करना सतत विकास को तेजी से बढ़ावा देना

अलवर की सिलीसेढ़ झील राजस्थान की पाँचवीं रामसर साइट
हाल ही में 12 दिसम्बर को राजस्थान की सिलीसेढ़ झील राजस्थान की 5वी रामसर साइट घोषित किया तथा,भारत की 96 वां रामसर स्थल के रूप में चिन्हित किया गया हे, यह झील अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित है इस झील का निर्माण 1875 ईस्वी में महाराज विनय सिंह द्वारा करवाया गया था इस झील को राजस्थान का नंदन कानन भी कहते हैं महाराजा विनय सिंह जी ने इस झील का निर्माण शहर के जल आपूर्ति के लिए बनाई थी लेकिन समय के साथ यह एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र में बदल गई यह झील राजस्थान की मीठे पानी की झील है तथा इसमें अनेक प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों का आवास स्थान हे यह पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र का एक केंद्र बन गया |
सिलीसेढ़ झील का जैव विविधता में बहुत बड़ा योगदान है इस झील में अनेक प्रकार की जलीय वनस्पतियों, मछलियों ,500 से ज्यादा मगरमच्छ और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है। यहाँ सर्दियों के मौसम में कई प्रवासी पक्षी आते हैं, जिनमें— पेलिकन,फ्लेमिंगो ,कॉमन कूट, ग्रे हेरॉन ,स्टॉर्क, अनेक प्रकार के प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण है जैव विविधता की दृष्टि से यह झील अत्यंत समृद्ध मानी जाती है। इसी वर्ष 5 जून 2025 को राजस्थान के मेनार (उदयपुर) और खीचन (फलोदी ) को भी रामसर स्थल का दर्जा दिया गया था

सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित होने का महत्व
- इस झील को रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा यहां पर विशेष योजनाएँ को लागू किया जाएगा |
- अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने से इको-टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा तथा पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा |
- आर्द्रभूमियाँ जल को संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं तथा जल संरक्षण को मदद मिलेगी
- स्थानीय लोगों की आजीविका, हस्तशिल्प, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे।
- अलवर पहले से ही सरिस्का टाइगर रिजर्व, ऐतिहासिक किले और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। अब सिलीसेढ़ झील के रामसर साइट बनने से अलवर की वैश्विक पहचान बढ़ेगी
- पर्यावरणीय शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा जिले को एक इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा सकेगा
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राजस्थान की रामसर साइट्स की सूची
- केवलादेव राष्ट्रीय अभ्यारण (1981)
- सांभर झील (1990)
- मेनार गांव (उदयपुर) – 5 जून 2025
- खीचन (फलोदी) – 5 जून 2025
- सिलीसेढ़ झील (अलवर) – 12 दिसंबर 2025
अब तक राजस्थान में 5 रामसर साइट घोषित किया जा चुका है |
FAQ: अलवर की सिलीसेढ़ झील (Ramsar Site)
1. सिलीसेढ़ झील कहाँ पर स्थित है?
उत्तर: सिलीसेढ़ झील राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है।
2. सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट कब घोषित किया गया?
उत्तर: 12 दिसम्बर 2025 को राजस्थान की पाँचवीं रामसर साइट के रूप में घोषित किया गया है,
3. सिलीसेढ़ झील का निर्माण किसने और कब कराया?
उत्तर: सिलीसेढ़ झील का निर्माण 1845 ई. में अलवर के महाराजा विनय सिंह द्वारा कराया गया था।
4. सिलीसेढ़ झील में कौन-कौन से प्रमुख जलीय जीव पाए जाते हैं?
उत्तर: सिलीसेढ़ झील में रोहू, कतला, मृगल जैसी मछलियाँ ,कछुए, और जल साँप, मेंढक जैसे उभयचरकमल, हाइड्रिला ,जैसी जलीय वनस्पतियाँ
पाई जाती हैं।