पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना 2025
राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई “पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना” (Pandit Deendayal Upadhyay Poverty-Free Village Scheme) राज्य के ग्रामीण विकास और समाज-कल्याण की दिशा में एक महत्वाकांक्षी और परिवर्तनकारी कदम है। इस योजना की पृष्ठभूमि, उद्देश्य, मुख्य घटक, लाभार्थियों, कार्यान्वयन रणनीति, और चुनौतियों का विश्लेषण करेगा।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना परिचय
राजस्थान सरकार ने 2025 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह योजना लॉन्च की। पहले चरण में 5,000 ग्रामों को “गरीबी मुक्त” बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के लिए कुल ₹300 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
यह कदम राज्य के उन परिवारों को आर्थिक सशक्तिकरण देने की दिशा में है, जो गरीबी रेखा (BPL) के भीतर बसे हुए हैं।
लाभान्वित वर्ग – चिन्हित गांवों के सभी बी.पी.ए परिवार
पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना उद्देश्य और लक्ष्य
यह योजना मुख्यतः निम्नलिखित उद्देश्यों पर केंद्रित है:
1. बी.पी.एल. जनगणना 2002 के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवापी के जीवन सहर एवं जीवन की गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार लाकर उनों गरीबी की रेखा से ऊपर लाना
2. आर्थिक स्वावलंबन
परिवारों को स्वरोजगार और आजीविका के साधन प्रदान करना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
3. समेकित विकास
प्रत्येक लक्ष्य ग्राम के लिए “Poverty-Free Village Action Plan” तैयार किया जाएगा, जिसमें अन्य सरकारी कल्याण योजनाओं के साथ समन्वय हो।
4. पुरस्कार और प्रोत्साहन
वे परिवार जो अपनी मेहनत और प्रयासों से गरीबी रेखा से ऊपर आ जाते हैं, उन्हें ₹21,000 का प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
साथ ही, ऐसे परिवारों को “आत्मनिर्भर परिवार कार्ड” (Atmanirbhar Parivar Card) भी जारी किया जाएगा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना लाभार्थी यानि कौन करेगा लाभ
पहले चरण में 5,000 गांव चुने गए हैं।
इस चरण में लगभग 30,631 BPL परिवारों की पहचान की गई है।
उन परिवारों के लिए भी आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं जो अभी भी गरीबी रेखा के नीचे हैं और मदद की ज़रूरत है।
पहले ही गरीबी रेखा से ऊपर आ चुके परिवारों को ₹21,000 का प्रोत्साहन मिलेगा और उन्हें आत्मनिर्भर परिवार कार्ड जारी किया जाएगा।